कार्यशालाएं

कलाकार शिविर एवं कार्यशालाएं – विलुप्तप्राय किन्तु बहुमूल्य सांस्कृतिक परम्पराओं का संरक्षण और संवर्धन संग्रहालय का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा है | इस विचार को ध्यान में रखते हुए संग्रहालय ने जनजातीय तथा लोक कलाकारों के कलाकार शिविरों एवं कार्यशालाओं के आयोजन की शुरुआत 1992 में धातु, लकड़ी, बांस इत्यादि में कार्य करने वाले जनजातीय व लोक कलाकारों की एक कार्यशाला – “ पड़ाव “ आयोजित कर की | अब तक भोपाल स्थित परिसर तथा देश के कई अन्य स्थानों पर भी चार अंतर्राष्ट्रीय कार्यशालाओं सहित 100 से अधिक कलाकार शिविरों और कर्शालाओं का आयोजन किया जा चुका है | पड़ाव 1993, चरैवेति, चिन्हारी, द्वीपान्तरी, पारम्पर्या, रचना प्रसंग, रंग वैभव,सर्जना, तंतुजा, कृति, अनंत यात्रे आदि इस श्रंखला में आयोजित कुछ महत्वपूर्ण कलाकार कार्यशालाएं है|

Updated date: 02-04-2016 02:45:17