संग्रहालय शिक्षा कार्यक्रम

संग्रहालय शैक्षणिक कार्यक्रम – संग्रहालय द्वारा साल्वेज एवं स्थानीय संसाधन प्रबंधन परम्पराओं के संरक्षण हेतु कार्यक्रम के भाग के रूप में वर्ष 1988-89 में सृजनात्मक कला रूपों के प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण पर एक श्रंखला की शुरुआत की गयी | करो और सीखो संग्रहालय शैक्षणिक कार्यक्रम नामक यह श्रंखला गृहणियों और विद्याथियों को ग्रामीण तथा जनजातीय समाजों में प्रचलित पारंपरिक कला और शिल्पों के व्यावहारिक प्रदर्शन तथा सीखने के अवसर उपलब्ध कराने को उद्देशित थी | श्रंखला में पहला कार्यक्रम मिटटी से आकृति नामक दस दिवसीय कार्यशाला थी |इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पारंपरिक कलाकारों से मिटटी के बर्तन बनाना सीखा | पारंपरिक कलाएं तथा पुनरावृत्ति नामक दो विशेष कार्यक्रमों का आयोजन 1991-92 में विशेष रूप से महिलाओं के लिए किया गया | तब से लगभग 200 करो और सीखो शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है| यह कार्यक्रम केवल विभिन्न पारंपरिक कला रूपं से जुड़े ज्ञान को ही उजागर नहीं करता बल्कि लोगों में विभिन्न स्थानीय परम्पराओं के प्रति जागरूकता का विकास तहत संबंधित शिल्पकारों में मनोबल दृढ़ करने का प्रयास तथा प्रतिभागी प्रशिक्षणार्थियों व पारंपरिक समुदायों के बीच प्रत्यक्ष संवाद के स्थल का भी सृजन करता है |

पूरे वर्ष भर देश तथा विदेश से सामान्य दर्शको  तथा विशेष समूहों के लिए प्रदर्शिनियों के भ्रमण आयोजित किये जाते है | सूचना साझेदारी हेतु जनजातीय शोध संस्थान, वन, प्रशासन , पत्रकारिता इत्यादि विभिन्न प्रशिक्षण संस्थाओ के प्रशिक्षणार्थियों हेतु गाइड सुविधा उपलब्ध कराई जाती है |स्कूली बच्चों के लिए विशेष शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है | भोपाल तथा आस पास के क्षेत्रों से 50 से 150 प्रति समूह बैचेस में स्कूली बच्चे संग्रहालय का भ्रमण करते है | इन बच्चों को मानव आवास एवं पर्यावरण की विषय वस्तु पर जानकारी दी जाती है तथा इसी विषय वस्तु पर मिटटी तथा ड्राइंग के माध्यम से रचनात्मक कार्य करने के अवसर भी उपलब्ध कराये जाते है |

Updated date: 20-06-2016 12:52:47