कला एवं शिल्प

भारत में कला एवं शिल्प जीविकापार्जन के साधन हैं | शोकिया टूर पर इनका इस्तेमाल किया जाना एक पश्चिमी धारणा है| भारतीय लोक एवं समाजों में कला एवं शिल्प का जन्म उनकी आवश्यकता होने तथा लोगों के सचेत होने पर हुआ | जिसने उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति की तथा जो बाद में ‘ शिल्प’ कहाई |कला एवं शिल्प लोगो को जीविका तो उपलब्ध करातें ही हैं इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि जीवन के अधिकतर अवसरों जैसे जन्म, दीक्षा संस्कार, विवाह, मृत्यु के साथ साथ वार्षिक एवं ऋतू सम्बन्धी त्योहारों पर भी इनका प्रयोग किया जाता है | अतः इस वर्ग के अधिकांश प्रदर्शों में टेराकोटा, चित्रकारी, काष्ठ एवं धातु निर्मित प्रादर्शों को सम्मिलित किया गया है जो भारत में पारंपरिक एवं सामयिक ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन के सामाजिक-धार्मिक क्रम के अभिन्न अंग हैं | इस वर्ग अंतर्गत इं.गा.रा.मा.सं. द्वारा इस वर्ग अंतर्गत विभिन्न रूपों में कई रचनात्मक प्रादर्श एवं उनके माध्यम जिसमे टेराकोटा, काष्ठ, घास, शीप, लोहा, घंटियाँ एवं चित्र इत्यादि शामिल हैं, का संग्रह किया गया है |

Updated date: 16-08-2016 02:19:33