बागवानी

बागवानी अनुभाग – इं.गां.रा.मा.सं. का बागवानी अनुभाग निम्न उद्देश्यों के साथ पादप विज्ञान के सभी पक्षों,उनका संरक्षण तथा देशज वनस्पति की विषय वस्तु पर पौधों की प्रदर्शनी एवं उनका प्रलेखन से गहन सम्बद्ध है |

1. संग्रहालय की आवश्यकता के अनुरूप प्रकृति के करीब रहने वाले लोगों से औषधीय पादपों के बारे में उपयोगी सूचनाएं प्राप्त करना |
2. पौधे से सम्बंधित वाचिक परम्परा का दस्तावेजीकरण|
3. जनजातिय उपचारकों को उनके देशज ज्ञान पद्धति के संरक्षण में सहायता करना |
4. जनजातिय/ लोक औषधज्ञों की एक निर्देशिका तैयार करना| लोगों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु जागरूकता का विकास करना |

बागवानी अनुभाग द्वारा किये जाने वाले कार्य –

इं.गा.रा.मा.सं. 196.85 एकड़ के शैलखंड युक्त क्षेत्र में फैला हुआ है | संग्रहालय की बागवानी इकाई भावनात्मक रूप से इं.गा.रा.मा.सं. में उपलब्ध भूमि के विकास में संलग्न है तथा निम्नानुसार परिणाम प्राप्त किये है –

1. परिसर के पौधों की वर्गीकरण वैज्ञानिकों की सहायता से पहचान कर कुल 183 पौध प्रजातियों की पहचान की गयी |
2. अनुभाग ने 40 एकड़ चट्टानी बंजर भूमि को 22500 ट्रक मिटटी से ढँक कर अपेक्षाकृत उपजाऊ भूमि में परिवर्तित किया |
3. अनुभाग संग्रहालय परिसर की लैंडस्केपिंग में संलग्न है |
4. 156 औषधीय पौध प्रजातियों के प्रादर्शों के साथ परिसर में एक औषधीय वाटिका का विकास किया गया |
5. पहाड़ी ढलानों के साथ साथ एक वनस्पतिक पथ का विकास किया गया |
6. इस अनुभाग ने देश के विभिन्न स्थानों पर जनजातीय उपचारकों/ पारंपरिक औषधज्ञों की प्रतिभागिता में कुछ कार्यशालाएं / प्रदर्शन भी आयोजीय किये है |
7. देशा के विभिन्न भागों से 7 पुनीत वनों को परिसर में मुक्ताकाश प्रादर्श के रूप में प्रतिरूपित किया गया |
8. लोगों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पुनर्जीवीकरण हेतु चेतना के विकास के लिए भारत के पुनीत वनों पर 7 मुक्ताकाश प्रादर्श प्रतिरूपित किये गये|
9. भारतीय भू विज्ञान सर्वेक्षण के माध्यम से 50x50 फीट आकार का वास्तविक शैल प्रकारों का भारत का एक त्रिआयामी मानचित्र विकसित किया गया |
10. अनुभाग ने रासायनिक प्रदूषण को टालने तथा नाडेप तथा कीट खाद की सहायता से जैविक खाद का स्वयं का उत्पाद तैयार किया

Updated date: 23-01-2017 05:24:56