संरक्षण इकाई

संरक्षण इकाईः संग्रहालय में एक रासायनिक संरक्षण इकाई का विकास भारत के असमान जलवायु क्षेत्रों जैसे हिमाच्छादित हिमालय से लेकर राजस्थान के शुष्क क्षेत्र एवं अत्यंत नमीयुक्त समुद्र तटीय क्षेत्रों से प्राप्त संरचनाओं एवं प्रादर्शों के संरक्षण हेतु किया गया है। संग्रहालय द्वारा अपने स्थायी संग्रह में लगभग 25 हजार संग्रहालय प्रादर्शो को संजोया गया है। इनमें से अधिकांश प्रकृति अनुरूप एथ्नोग्रफिक एवं विशिष्ट है | ये मिश्रित प्रकृति के है, प्रत्येक कई तरह की सामग्रियों से निर्मित है और इसलिय इनके निर्माण में विशेष संरक्षण तकनीक का इस्तेमाल होता है | इं.गाँ.रा.मा.सं की रसायन प्रयोगशाला कीड़े एवं फफूंद इत्यादि से प्रादर्शों की सुरक्षा हेतु सुविकसित है |संग्रहालय की संरक्षण इकाई ने कीड़ों और फफूंद इत्यादि जैव संरचनाओं के आक्रमण से सुरक्षा हेतु संग्रहालय में ही सुविधाएँ विकसित की है। प्रादर्शों को धूम्रीकरण, कीटनाशकों के छिड़काव, एवं चूहामार दवाओं आदि का छिड़काव कर उपचारित किया जाता है। प्रादर्श भंडार तथा अंतरंग प्रदर्शनियों में उचित आपेक्षित आद्रता बनाये रखने के लिये सिलिका जैल कणों का प्रयोग किया जाता है। रसायन प्रयोगशाला में विभिन्न प्रकार के स्वच्छता सम्बन्धी पदार्थों, सुरक्षात्मक पदार्थोंएवं फफूंदनाशी आदि के प्रयोग से प्रादर्शों की सफाई, जीर्णोधार एवं संरक्षण कार्य किया जा रहा है | चमड़े एवं लकड़ी के प्रादर्शों के संरक्षण हेतु प्राकृतिक तत्वों जैसे लहसुन का रस, लाख, अलसी का तेल, करंज का तेल , अरंडी का तेल आदि के गुणों के परीक्षण हेतु विभिन्न प्रयोग किये जा रहे है |मुक्ताकाश प्रदर्शनी में प्रदर्शित लकड़ी के प्रादर्शों के संरक्षण हेतु प्राकृतिक पदार्थों एवं रासायनिक तत्वों के समावेश (थायमोलक्रिस्टल को अलसी के तेल के साथ प्रयोग)जैसी नवीन विधियाँ तैयार की गयी है| इस प्रकार प्रयोगशाला संरचनाओं एवं प्रादर्शों के रख रखाव में रसायनों को ही नहीं साथ ही प्राकृतिक तत्वों का भी प्रयोग कर रही है |इकाई संग्रहालय एवं सांस्कृतिक धरोहर के प्रबंधन में कार्यरत अन्य संगठनों के अधिकारियों हेतु एथ्नोग्रफिक प्रादर्शों के संरक्षण पर प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएं भी आयोजित करती है |

Updated date: 23-01-2017 05:28:22